खासमखास

पत्रकारिता के काशी असीम भैया 

आज असीम भैया की प्रथम पुण्यतिथि है | 65 वर्ष की अवस्था में वरिष्ठ पत्रकार और लब्धकीर्ति साहित्यकार सत्य प्रकाश असीम का कोरोना के चलते देहरादून में तीन मई 2021 को निधन हो गया था | उन्हें कई वर्षों से पार्किंसन रोग ने जकड़ रखा था और दिल्ली की डॉक्टर Read more…

साहित्य

बच्चन सिंह को जितना मैंने जाना …..

मैं आदरणीय बच्चन सिंह जी का शुरू से प्रशंसक रहा हूँ। वजह साफ़ है। उनका अति सक्रिय होना। वे मौलिक रूप से तो थे पत्रकार , लेकिन साहित्यकार होना उनकी मौलिकता से बाहर न था। वे विभिन्न अखबारों में गुरुतर दायित्व निभाने के साथ ही एक समय ऐसा भी आया Read more…

साहित्य

सुकीर्ति भटनागर का बाल साहित्य 

पटियाला [ पंजाब ] की रहनेवाली सुख्यात कवयित्री कीर्ति भटनागर बाल साहित्य की भी सशक्त हस्ताक्षर हैं | उन्होंने अपनी बाल कविता संग्रह ” अच्छे सब बन जाएं मां” मेरे पास समीक्षार्थ भेजी थी। इसे मैंने पढ़ी आद्योपांत। सभी 37 कविताएं बड़े जतन और मनोयोग से लिखी गई हैं। कवयित्री Read more…

साहित्य

ख़ुशी के पल संजोएं 

[ एक पूर्व मंत्री जी की भार्या और मेरी आदरणीया बहन सुनीता शर्मा जी के आलेख , जो जीवन से उदासी और निराशा के वातावरण को दूर भगाने पर केन्द्रित था , पर मेरी एक फेसबुकी प्रतिक्रिया | यह बात 2011 की है | मेरी इस प्रतिक्रिया के बाद सुनीता Read more…

सामाजिक सरोकार

सच है कभी ‘अनाम मरता नहीं ‘

उस समय के उदीयमान कवि / कहानीकार वीरेंद्र सिंह गूंबर मेरे यहां पधारे। दो पुस्तकें मुझे भेंट स्वरूप दीं, इस आग्रह के साथ कि इनकी समीक्षा लिख दें। मुझे उन्होंने बताया कि इनसे पहले उनकी दो पुस्तकें छप चुकी हैं। 1999 में उनका काव्य संग्रह ‘निमंत्रण’ और 2002 में कहानी Read more…

सामाजिक सरोकार

‘ पिंजर ‘ को स्वस्थ बनाएं  

अमृता प्रीतम साहित्य जगत की चमकता सितारा हैं | मूलतः पंजाबी में लिखने वाली उपन्यासकार हैं | कविताएं भी लिखी हैं और पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री होने का श्रेय प्राप्त किया है | 1919 ई. में वर्तमान पाकिस्तान के गुजरांवाला शहर में जन्मी इस महान लेखिका की दो सौ Read more…

साहित्य

एक लेखनी : साठ रंग ‘ और ‘ बूँद – बूँद बरसे बदरा ‘

वरिष्ठ कवि , लेखक व सात्विक जीवन के सफल अनुगामी और बहुत ही मधुर एवं सहिष्णु स्वभाव के धनी आदरणीय डाक्टर ज्ञान सिंह ‘ मान ‘ जी [ पीएच . डी , डी . लिट ] की महत कृति – ‘ एक लेखनी : साठ रंग ‘ पूरी पढ़ी | Read more…

अतिथि लेखक/पत्रकार

लीक से हटकर ” लालटेनगंज “

” लालटेनगंज ” पढ़ डाली | लीक से थोड़ा हटकर है यह | इसमें अख़लाक़ अहमद ज़ई की 15 कहानियां हैं, जिन्हें वे प्रतिनिधि मानते हैं अर्थात अपनी विभिन्न शैली – शिल्प का अगुआ ! शीर्षक अच्छा है , वरना प्रतिनिधि कहानियों की भीड़ में खोने का ख़तरा और अंदेशा Read more…

खबरनामा

प्रदीप मिश्र की ‘भूख’ का यथार्थ 

प्रतिभावान कथाकार प्रदीप मिश्र की चर्चित कहानी ‘भूख ‘ पढ़ने का लोभ – संवरण नहीं कर सका। यह कहानी समाज की सीधी अक्कासी करती है, जो हक़ीक़त पर आधारित अधिक लगती है। अगर ऐसी न होती, तो शायद ही पुरस्कृत होती। वैसे किसी भी समाज में हर जगह एक जैसी Read more…

साहित्य

अब ” जेबकतरा ‘ सामने है….

मैं किसी कृति की समीक्षा नहीं करता। अनजाने में समीक्षा के पुट मिलने भी लगें, तो समझिए कि वह मेरे मन की बात नहीं। इसकी एक बड़ी वजह है । वह है ‘ सारिका ‘ में एक समीक्षक का एक वाक्य, जो मेरे परम स्नेही एवं मित्र विष्णु प्रभाकर जी Read more…

साहित्य

‘हरकारा’ – आख़िर मैं क्या लिखूं ?

भाई अख़लाक़ अहमद ज़ई की दो पुस्तकें मिलीं | ‘हरकारा’ जो पत्र संकलन है और दूसरी जेबकतरा जो लघुकथा संग्रह है। अभी हरकारा पढ़ी है। तेज़ी से लुप्त हो रही पत्र लेखन विधा को संबल देती हरकारा लेखक का जीवन दर्शन भी है। वैसे अब यह विधा बहुत कुछ पत्र Read more…

साहित्य

हरफ़न मौला पत्रकार विद्या प्रकाश 

आज स्वप्न में प्रिय मित्र भाई विद्या प्रकाश नज़र आए | उनकी याद इस क़दर आई कि कुछ लिखने को मजबूर हो गया | आत्मिक शांति के लिए यह नागुज़ीर भी था | अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हिंदी जगत को ओतप्रोत करनेवाले सुख्यात पत्रकार विद्या प्रकाश लगभग पांच वर्ष पहले हमसे Read more…

सामाजिक सरोकार

” राग दरबारी ” या दरबारे राग ?

” राग दरबारी ” की काफ़ी तारीफ़ सुनी थी | लोभ – संवरण न कर सका | अमेज़ॉन से मंगा ली,जो राजकमल पेपरबैक्स से छपी है | यह बड़े ही सुख्यात साहित्य-रचनाकार श्रीलाल शुक्ल की लोकप्रिय कृति है | वे कड़ी मेहनत और लगनशीलता के कारण पी सी एस से Read more…

साहित्य

लोक व्यवहार पर बेजोड़ पुस्तक

आख़िर यह पुस्तक क्यों पढ़ी जाए ? इसके जवाब में यह बात आसानी से कही जा सकती है कि डेल कार्नेगी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक, जिसकी अब तक तीन करोड़ से अधिक प्रतियां छप चुकी हैं, ऐसी नहीं हर वह व्यक्ति न पढ़े जो प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला की खोज Read more…

साहित्य

मातृ भाषा का महत्व

मनुष्य की मातृ भाषा उतनी ही महत्व रखती है , जितनी कि उसकी माता और मातृ भूमि रखती है | एक माता जन्म देती है , दूसरी खेलने – कूदने , विचरण करने और सांसारिक जीवन – निर्वाह के लिए स्थान देती है , और तीसरी मनोविचारों और मनोगत भावों Read more…