अतिथि लेखक/पत्रकार
छीजते रिश्तों और लुप्त हुए संसाधनों की महागाथा- त्राहिमाम युगे-युगे
“त्राहिमाम युगे-युगे” एक पुकार है उस अत्याचार, शोषण, भ्रष्टाचार से बचाने का जो युगों-युगों से इस धरती पर अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए हैं। ‘त्राहिमाम युगे-युगे’ उन परम्पराओं के गुम हो जाने की कथा है जिन्हें कभी दबे-कुचले लोग ज़िन्दा रखे हुए थे। यह उपन्यास उन गुमशुदा Read more…