मैं ‘तुम ‘ हो और तुम ‘ मैं ‘
मैं शरीर, तुम आत्मा
बस, यहाँ से जाने के बाद
क्या होगा ?
मुझे बताकर जाना
मैं जानता हूँ कि
किसी को पता नहीं
फिर भी तुम कुछ न कुछ ज़रूर हो
और मैं भी !
जब मेरा मन-मस्तिष्क
दूर हो जाएगा मुझसे
तब पास होगा तुम्हारा हृदय
जिसमें वास करेगी आत्मा
तो मैं जाकर ही क्या करूँगा ?
जब आत्मा तुम्हारे पास रहेगी ?
दिशा बोध करेगी
एकाकीपन दूर करेगी
सृष्टि/ कृति
श्रेष्ठ करेगी
फिर
मेरा जाना
तुम्हारा जाना
आना – जाना होगा
शेष बचेगा
” मन तू शुदम तू मन शुदी * ” !
…………..
* मैं ‘ तुम ‘ हो जाऊँगा और ‘ तुम ‘ मैं ।
–  राम पाल श्रीवास्तव ‘ अनथक ‘
13 जनवरी 2023

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