
शब्द अपने भाव और अर्थ कैसे बदल लेते हैं ? कहां से चलकर कहां पहुंच जाते हैं ? इसी केंद्रीय विषय पर पेश हैं दो भिन्न शिल्प सौंदर्य में दो काव्य रचनाएं –

शब्द अपने भाव और अर्थ कैसे बदल लेते हैं ? कहां से चलकर कहां पहुंच जाते हैं ? इसी केंद्रीय विषय पर पेश हैं दो भिन्न शिल्प सौंदर्य में दो काव्य रचनाएं –








“त्राहिमाम युगे-युगे” एक पुकार है उस अत्याचार, शोषण, भ्रष्टाचार से बचाने का जो युगों-युगों से इस धरती पर अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए हैं। ‘त्राहिमाम युगे-युगे’ उन परम्पराओं के गुम हो जाने Read more…
राम पाल श्रीवास्तव ‘अनथक’ (विद्वंमुक्तामणिमालिका) संपादक – पवन बख्शी ब्लूजे बुक्स दिल्ली प्रथम संस्करण – 2025 ……………………………… किसी मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान उसकी शारीरिक बनावट अथवा सामाजिक हैसियत से पूर्णतः नहीं हो सकती है Read more…
“नई समीक्षा के सोपान” विधा : समीक्षा संग्रह द्वारा : रामपाल श्रीवास्तव शुभदा बुक्स द्वारा प्रकशित प्रकाशन वर्ष ;2025 मूल्य : 280.00 प्रतिक्रिया क्रमांक : 188 राम पाल श्रीवास्तव जी की समीक्षात्मक पुस्तक “नई समीक्षा Read more…