धर्म

पिताश्री का गुलाब

अब भी खूब खिलता है मेरे आंगन का लाल गुलाब याद दिलाता है पिताश्री का जो इसके बानी थे और मेरे भी… उस समय मैं नहीं था जब उन्होंने लगाई थी दशकों पहले इसकी कलम गुलाब था आज भी है सदा सर्वदा रहेगा क्योंकि गुलाब के बिना जीवन नहीं यह Read more…

सामाजिक सरोकार

शब्द – शब्द

शब्द क्या है ? अंदर का बंधन अनहद नाद दिलों तक पहुंचने का तार रूह को तर – बतर का औज़ार झंकृत करता शब्दकार हक़ीक़त की परछाई बनाकर एक बहाना बनाकर कोई कितना भी ऊपर चढ़ जाए शब्द नहीं तो काठी नहीं जिस पर टिके जो बिन शब्दों के विचारों Read more…

खासमखास

मेरा अस्तित्व

मेरा अस्तित्व……..……… आज साठ पूरा करने के क़रीब पहुंचकर देखा अपने अस्तित्व को अपने आपको अपने में खोकर। अख़बार के मानिंद तुड़े – मुड़े अपने अस्तित्व को जिसके पीछे पड़ा रहा दिनभर शाम के ढलते दियारे को लेकर अब कहां फुरसत कि अपने पन्ने को सीधा करूं ? पढूं, वह Read more…

साहित्य

शीत लहर में मृत्यु 

आज बह आए हैं आँसू तुम्हारी आँखों से हिमानी की एक – एक बूंद रिस रही है घिस रही है उम्र सरक रही है पास आने को जताने कि भ्रम अवरुद्ध हो रहा है ! थोड़ी और आँसुओं की बरसात करो इतनी कि आँचल भीग जाए डर जाए सौभाग्य से शीत Read more…