अतिथि लेखक/पत्रकार

छीजते रिश्तों और लुप्त हुए संसाधनों की महागाथा- त्राहिमाम युगे-युगे

     “त्राहिमाम युगे-युगे” एक पुकार है उस अत्याचार, शोषण, भ्रष्टाचार से बचाने का जो युगों-युगों से इस धरती पर अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए हैं। ‘त्राहिमाम युगे-युगे’ उन परम्पराओं के गुम हो जाने की कथा है जिन्हें कभी दबे-कुचले लोग ज़िन्दा रखे हुए थे। यह उपन्यास उन गुमशुदा Read more…

अतिथि लेखक/पत्रकार

त्राहिमाम युगे युगे – कालजयी उपन्यास

मेरे उपन्यास ” त्राहिमाम युगे युगे ” की ग्रॉक ( Grok ) पर आदरणीय नरेन्द्र कुमार सिंह (संपादक, “समय सुरभि अनंत”) लिखी गई समीक्षा। बहुत आभार, धन्यवाद संपादक महोदय के साथ ग्रॉक का भी। …… “त्राहिमाम युगे युगे ” – एक कालजयी उपन्यास राम पाल श्रीवास्तव द्वारा लिखित उपन्यास “त्राहिमाम Read more…

खासमखास

निकृष्ट होती ग्रामीण व्यवस्था का यथार्थमयी चित्रण 

कवि, शोधार्थी, उपन्यासकार राम पाल श्रीवास्तव द्वारा रचित उपन्यास “त्राहिमाम युगे युगे” के शीर्षक से ही पाठक मन में यह प्रभाव पड़ जाता है कि यह कृति हर युग में मनुष्य की मनुष्य के हाथों हो रही प्रताड़ना, क्रूर-खसूट अमानुषिकता से उपजे करने की दर्द गाथा है, क्योंकि यह विनाशकारी Read more…