खबरनामा
कृतियों का धारदार विश्लेषण
आज के दौर की प्रशंसात्मक समीक्षाओं भरे साहित्यकाश में रचनाओं के ताने-बाने की कसौटी पर कसती हुई समीक्षा, समालोचना या आलोचना करना समीक्षक या आलोचक के लिए ‘अपने पैरों पर कुल्हाड़ी’ मारने जैसा है क्योंकि आज लेखक स्वयं की आत्म-मुग्धता एवं आत्मालाप में ही खोया हुआ है, ऐसे में वह Read more…